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सर्वविद्या की राजधानी वाराणसी (काशी) के समीपवर्ती धान के कटोरे के नाम से विख्यात ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित बाबा कीनाराम की पावन भूमि चंदौली जनपद के असंख्य विद्यार्थियों की सहज सुलभ पठन-पाठन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षाविद् एवं समाजसेवी श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह जी के कुशल नेतृत्व एवं अथक प्रयासों से सन् 1996 में स्थापित ‘‘माॅ खण्डवारी उच्च शिक्षण संस्थान’’ समूह विगत 21 वर्षो के विस्तृत काल खण्ड में चारों तरफ खुला वारावरण और विशाल प्रांगण, पश्चिम वाहिनी गंगा का तट, हरे भरे तहराते हुए घास के मैदान, रेग विरंगे पुष्पों से आच्छादित वाटिकाओं के सौन्दर्य से युक्त ‘माँ खण्डवारी देवी इण्टर काॅलेज’ ‘माँ खण्डवारी स्नातकोŸार महाविद्यालय’, ‘माँ खण्डवारी विधि महाविद्यालय’, ‘माँ खण्डवारी महिला महाविद्यालय’ के विस्तृत शिक्षण समूह के माध्यम से ग्रामीण परिवेश के अनेकानेक विद्यार्थियों को कला, विज्ञान, सहित बी.एड, बी.टी.सी. एवं एल.एल.बी. (लाॅ) के क्षेत्र में उत्कृष्ट पठन-पाठन उपलब्ध कराने के साथ अपनी विशेषताओं और शैक्षणिक वातारण के कारण पूर्वांचल की सर्वोच्च शिक्षण संस्थान समूह के रूप में स्थापित हो निरन्तर पुष्पित एवं पल्लवित हो रहा है।
विगत वर्षों के अपने अनुभव एवं पारम्परिक शिक्षा के साथ ग्रामीण युवाओं को भी रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से प्रशिक्षित कर रोजगार प्राप्त करने के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध करा उन्हें स्वालम्बी बनाने के उद्देश्य से समूह द्वारा बिसूपुर, अवस्थित 9 एकड़ के विस्तृत परिसर में नूतन साज सज्जा के साथ निर्मित भवन, सम्पूर्ण प्रयोगशालाओं सहित कम्प्यूटर सेंटर, लाइब्रेरी, वर्कशाॅप से सुसज्जित ‘श्री त्रिदण्डी देव हनुमत टेक्निकल काॅलेज’ की स्थापना के साथ 3 वर्षीय डिप्लोमा इंजीनियरिंग के विभिन्न पाठ्यक्रम प्रारम्भ होने से ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को भी अध्ययन के उपरान्त शत-प्रतिशत रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

विगत वर्षों के अपने अनुभव एवं पारम्परिक शिक्षा के साथ ग्रामीण युवाओं को भी रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से प्रशिक्षित कर रोजगार प्राप्त करने के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध करा उन्हें स्वालम्बी बनाने के उद्देश्य से समूह द्वारा बिसूपुर, अवस्थित 9 एकड़ के विस्तृत परिसर में नूतन साज सज्जा के साथ निर्मित भवन, सम्पूर्ण प्रयोगशालाओं सहित कम्प्यूटर सेंटर, लाइब्रेरी, वर्कशाॅप से सुसज्जित ‘श्री त्रिदण्डी देव हनुमत टेक्निकल काॅलेज’ की स्थापना के साथ 3 वर्षीय डिप्लोमा इंजीनियरिंग के विभिन्न पाठ्यक्रम प्रारम्भ होने से ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को भी अध्ययन के उपरान्त शत-प्रतिशत रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।